नोटबंदी: समाज के आखिरी आदमी पर तात्कालिक प्रभाव

Mon, 01/09/2017 - 23:19

8 नवंबर को प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी की घोषणा के बाद से   इस पर लगातार विश्लेशणों  का दौर जारी है । गरीब इस देश का या समाज की सबसे निचले स्तर की ईकाई है । देश में कोई भी  योजना बनायी जाए तो उसमें इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए  कि गरीबों पर इसका क्या असर होगा ? जब हम किसी योजना की सफलता का विश्लेषण  करें तो इस बात का ध्यान जरुर रखें कि इससे गरीबों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा।
नोटबंदी की सफलता या असफलता के बारे में बात करना अभी जल्दबाजी होगा लेकिन गरीबों पर तुरंत इसका क्या प्रभाव पड़ा इसका विश्लेषण जरुर किया जा सकता है । गरीबों पर त्तुरंत इसके प्रभावों कुछ भागों में विभाजित करके देखने की जरूरत है ।
गरीबों में एक वर्ग की अगर बात की जाए तो वो मजदूर वर्ग है जो अपने घरों से दूर रहकर बाहर शहर में काम करते हैं ।ये लोग फैक्ट्री मालिकों से मिलने वाली मासिक तनख्वाह से जीवन –यापन करते थे । नोटबंदी के बाद से धन के अभाव में इन लघु उद्योगों पर विपरीत प्रभाव पड़ा । फैक्ट्रियों में काम की कमी से ये मजदूर बेरोजगार हो गए  ।  आमदनी के अभाव में  इन मजदूरों का शहर में टिकना मुश्किल हो गया और वापस लौटना पड़ा । एक और खराब स्थिति का सामना इन्हें करना पड़ा जब फैक्ट्रियों के मालिको ने इन्हें पुराने नोट लेने पर मजबूर कर दिया । फैक्ट्रियों के मालिकों को अपना काला धन खपाने की आवश्यता थी । मजदूरों को ये धन बाँटकर आसानी से उन्होंने इसे खपा दिया । इस स्थिति के कारण इन मजदूरों को अपने काम के दिनों में लाइन में लगना पड़ा । ये गरीबों पर पड़ने नोटबंदी का सबसे बुरा प्रभाव पड़ा ।
दूसरा बड़ा गरीबों का वर्ग वो है जो प्रतिदिन कुछ काम करके कमायी करता है जैसे रिक्शे वाले , रेहड़ी पर दुकान लगाने वाले लोग । इन लोगों से बात करने पर पता चलता है कि इन्हें नोटबंदी से कोई दिक्कत नहीं हुई । ये लोग इस बात से खुश भी हैं कि काला धन रखने वालों पर किसी ने कारवाई की है । दरअसल इन्हें दिक्कत न होने का कारण इनके पास ज्यादा मात्रा में नकदी का न होना है । इसके अतिरिक्त इनके पास जो धन आता भी है वो छोटे नोटों के रुप में रहता है जिसे बदलने के लिए  इन्हें लाइनों में नहीं लगना पड़ा । ये लोग जो काम करते हैं वो लोगों की आधारभूत जरूरते हैं चाहें वो य़ातायात हो या सब्जी और फल  इलोगों के पास जैसे ही धन आता है वो ये काम जरुर करते हैं । इसलिए गरीबों का ये वर्ग नोटबंदी से ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ ।
गरीब जिन चीजों से प्रभावित होता है उनमें मँहगाई एक बड़ा फैक्टर है । मँहगाई पर अगर एक नजर डाले तो नोटबंदी के बाद से मँहगाई दर पिछले दो साल के  सबसे निचले स्तर पर चली गई है । सब्जियाँ जिनके दाम पिछले सालों में इतने ज्यादा थे  कि गरीब तो क्या मध्यमवर्गीय परिवार के लिए  भी सब्जी के नाम पर सिर्फ आलू का विकल्प बचता था । कई बार तो आलू के दाम भी इतने ज्यादा बढ जाते थे वो भी पहुँच के बाहर हो जाता था ।  अगर आज इनके दाम देखें तो बहुत दामों में बहुत बड़ी गिरावट देखने को मिली है । सारी सब्जियाँ सस्ती हैं और आसानी से खरीदने योग्य हैं । नोटबंदी का गरीबों पर पड़ने वाले प्रभाव में ये सबसे महात्वपूर्ण है ।
  नोटबंदी का एक उद्देश्य घरों में बंद पड़े हुए पैसे को वापस मुख्यधारा में लाना भी था । नोटबंदी के कारण बड़ी सख्यां मे वो पैसा वापस आया । इस पैसे का उपयोग अब विभिन्न योजनाओं को चलाने मे होगा । 31 दिसंबर को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन  में प्रधानंमत्री ने कई योजनाओं के शुरुआत करने की घोषणा की थी । अगर गर्भवती महिलाओं के लिए चलायी जा रही योजना व अन्य योजनाओं  का क्रियांवयन सही से होता है  तो निश्चित तौर पर ये गरीबों के लिए ही ये फायदेमंद होगा ।
इस तरह से अगर देखें तो सीधे तौर पर हम नोटबंदी से गरीबों को फायदा हुआ या नुकसान ये नहीं कह सकते । नोटबंदी ने गरीबों के व्यवसाय के हिसाब से उन पर प्रभाव डाला है । इस पूरी प्रक्रिया के गरीबों पर प्रभाव का पूर्ण इमानदारी से विश्लेषण होना चाहिए ताकि परेशान लोगों की मुश्किलें कम करने को लेकर सवाल उठाए जा सकें ।  

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