आज की धर्म, जाति की राजनीति में बापू होते तो खुद को कहां पाते!

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Nishant Trivedi Tue, 10/02/2018 - 00:52 Gandhi, MK Gandhi

जब महात्मा गांधी से देश की राजनीति में मची गंध के बारे में पूछा गया तो वो भावुक हो गए.देश में फैले तमाम मुद्दों पर बोलने लगे.उनका साक्षात्कार कर रहे पत्रकार के लिए सब कुछ समेटना मुश्किल था और पत्रकार भी आज के दौर का था तो उसने सीधा सवाल किया की- आज की धर्म और जाति की राजनीति में आप खुद को किस तरह से देखते हैं ?
जवाब सुनकर लगा की आज भी उनमें पुरानी धौंस है.नीचे उनका जवाब पढ़िए और देखिए उन्होंने अपनी एक उपलब्धि बताई है.

गांधी की उपलब्धि:

नाम मेरा मोहनदास करमचंद गांधी था ,मतलब जानते हो क्या है ? मतलब ये की जन्म से हिंदू था.अब हुआ ये की जब देश का बंटवारा हुआ तो मैंने मुसलमानों को देश से जबरदस्ती निकाले जाने का विरोध किया.इसी चक्कर में मारा भी गया.लिहाजा मेरे ऊपर ठप्पा लग गया की मैं मुस्लिमों का दलाल था और इस देश की 2018 में भी तमाम समस्याओं के लिए मैं जिम्मेदार हूं.क्योंकि मेरी वजह से ही मुसलमान आज भी इस देश में है.
अब प्वाइंट की बात ये है की नाम में मेरे मोहम्मद या अली नहीं था तो मुसलमान मेरे उनके लिए इतना करने के बावजूद कभी अपना आदर्श नहीं मान पाए.हिंदुओं की नाराजगी की वजह से तो मैं मारा ही गया.हालांकि वो सब ऐसे नहीं हैं.उनमें से कुछ हैं जो मुझे बापू कहना पसंद करते हैं.

अब दूसरे मुद्दे पर आते हैं.दलितों के मुद्दे पर.उस दौर में वो भेदभाव के भयंकर शिकार थे.मैंने उनका भला करने का प्रयास किया.मैंने उन्हें हरिजन कहा इसका मतलब था भगवान के बच्चे.मैंने खुद उनकी बस्तियों में जाकर खाया.लोगों को कहा ये भेदभाव खत्म करो.मैंने इतना किया लेकिन मैंने उनके लिए आरक्षण नहीं मांगा.मैंने कभी नहीं कहा की तुम हिंदू धर्म से अलग हो जाओ.लिहाजा वो भी मुझे अपना आदर्श नहीं मान पाए.सवर्ण शायद इतने प्रभावशाली ही थे की उन्हें इस मामले में मेरी ज्यादा बातों से फर्क नहीं पड़ा.लिहाजा उन्हें इस मामले में कुछ शिकायत जरूर नहीं है लेकिन मैं उस लायक उनके लिए भी नहीं बन सका जो वो मेरी फोटो लगी फेसबुक पोस्ट को शेयर करें.

इन सबके बीच मैं कभी कभी शांति से बैठकर सोचता हूं की क्या मैं अपने जीवन में वाकई इतना सब करने के बाद असफल हो गया? तो मेरा मन मुझे जवाब देता है शायद नहीं.वो मुझसे कहता है की जिस देश में भगवान और अल्लाह के नाम पर दंगे होते हों वहां तुम्हारे नाम पर आज कम से कम दंगे नहीं होते.जब जाति की हिंसा देश में भड़कती है तो तुम्हारी मूर्ति को तोड़ा नहीं जाता है.

नेताओं को आंदोलन के नाम पर जब भी कुछ टुच्चा सा भी करना होता है तो दिखावे के लिए ही सही वो तुम्हारी मूर्ति के नीचे ही आकर बैठते हैं.देश का प्रधानमंत्री आज ये जानते हुए भी तुम्हारा नाम लेता है की तुम्हारे साथ कोई वोट बैंक नहीं है.आज के प्रधानमंत्री का ऐसा करना तुम्हारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है.स्वच्छता मिशन के लिए तुम्हारी फोटो का इस्तेमाल करता है.इससे उसे बस इतना फायदा होगा की इतिहास में दर्ज हो जाएगा की मोदी ने भी कभी गांधी का नाम लिया था.

कुल मिलाकर मेरा मन मुझे बताता है आज भी मैं इस देश में वोट बैंक नाम के वायरस से बहुत दूर हूं.आज भी मैं आजाद हूं.धर्म जाति से उठकर जो मुझे वाकई अपनाना चाहता है वो अपनाता है क्योंकि वाकई मेरे नाम में ऐसा कुछ नहीं जिससे किसी को कुछ हासिल हो सके. मैं आजदी के लिए लड़ा और मैं आज भी आजाद हूं...

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