Tanishq का विज्ञापन सच्चा होते हुए भी क्यों झूठा है

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admin Sat, 10/17/2020 - 22:10 Tanishq ad, Tanishq controversy

कुछ साल पहले न्यूज़ चैनल में जॉब करने के दौरान मेरे एक मुस्लिम क्लीग ने ताना मारते हुए कहा कि यार, तुम लोगों का कोई ईमान नहीं है...तुम कहीं भी अपना सिर झुका देते हो। चाहे चर्च हो, गुरुद्वारा हो या मजार। पहले तो मुझे उसकी इस बात पर गुस्सा आया और फिर हंसी आई। मैंने कहा, दोस्त जिसे तुम हिंदुओं को रीढ़विहीन होना मानते हो सभ्य समाज इसे ही सेक्युलर होना कहता है। और सोचो ज़रा जिस एक ईश्वर में तुम ईमान रखने की बात करते हो अगर देश की बहुसंख्यक हिंदू आबादी भी वैसी सोच रखती, तो इस देश में इतने मज़हब, सम्प्रदाय क्या पनप पाते?

मेरे मुस्लिम साथी ने जो कहा मैं उसके लिए उसे गलत नहीं मानता, क्योंकि ये उसकी निजी विचार न होकर उसकी धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा है जिसमें एक ही ईश्वर का concept है और उसके अलावा किसी और के आगे सिर झुकाने की मनाही है। लेकिन मुझे लगता है ये मान्यता ही हिंदू-मुस्लिम से जुड़े सारे विवादों की जड़ है।

तनिष्क का मौजूदा एड भी आप इसी संदर्भ में देख सकते हैं। मुस्लिम घर में एक हिंदू लड़की की गोद भराई हो रही है। वो भी हिंदू रीति रिवाजों के साथ। बड़ी सुंदर बात है। इसमें भला किसी को क्या आपत्ति हो सकती है? लेकिन आपत्ति वहां शुरू होती है जहां ये पूछा जाता है कि क्या हिंदू लड़की का मज़हब बदले बिना उसकी मुस्लिम से शादी हो सकती है? क्या इसी तरह मुस्लिम लड़की का हिंदू घर में शादी करना इस्लाम में स्वीकार्य है?

इस बारे में खुद पवित्र कुरान कहती है कि अपनी लड़की की शादी एक से ज़्यादा देवताओँ को मानने वाले पुरूष से तब तक न करे जब तक कि वो इस्लाम में विश्वास न करने लगे। एक मुस्लिम गुलाम बहुदेववाद में यकीन रखने वाले शख्स से कहीं बेहतर है फिर चाहे वो आपको कितना भी आकर्षित क्यों न करे। Holy Koran, 2:221
Do not marry your women to polytheist men unless they believe in Islam; a Muslim slave is better than a polytheist even though he may attract you. - Holy Koran, 2:221

इसके बाद सवाल ये नहीं रह जाता कि एड बनाने वाला क्रिएटिव डायरेक्टर क्या सोचता है, समाज का बुद्धिजीवी क्या सोचता है, सवाल ये है कि क्या एक मुसलमान अपनी धार्मिक किताब में कही इस बात के खिलाफ जाकर ऐसी शादी करेगा? और अगर उसे उसका मज़हब अगर इसकी इजाज़त नहीं देता तो आप इन एड के ज़रिए जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र दिखाने की कोशिश करने की कोशिश कर रहे हो उसका औचित्य क्या है?

हिंदुओं की यही तो आपत्ति है कि साम्प्रदायिक सौहार्द्र का ये सफर फिर इकतरफा तो नहीं हो सकता। और जिस Inter religion शादी को आप Communal Harmony बताकर दिखा रहे हो अगर कोई Community उसमें Harmony नहीं देखती, तो आपकी ये अपील उसके लिए क्या मायने रखती है?

लोग सवाल तो लव जेहाद का भी उठा रहे हैं और फिल्मों में ऐसी प्रेम कहानियों को लेकर रचनात्मक लोगों के selective होने का भी, पर मैं अभी उसमें नहीं जाना चाहूंगा। बस एक बार फिर उस बात को दोहराना चाहूंगा कि इस देश में सबसे बड़ा झूठ है गंगा जमनी संस्कृति। क्योंकि जिस गंगा जमनी संस्कृति की दुहाई देकर लगातर माहौल खराब होने की बात की जा रही है मैं अक्सर सोचता हूं कि उस संस्कृति के आखिर मायने क्या हैं? किसी भी तरह का भाईचारा, किसी भी तरह की मोहब्बब, धर्मनिरपेक्षता Absolute होती है। धर्मनिरपेक्षता या गंगा जमनी संस्कृति नियम या शर्तों के साथ नहीं आती। उसका ये मतलब नहीं होता कि हिंदू ईद पर मुस्लिम को गले लगकर बधाई तो दे तो देगा लेकिन होली पर गुलाल लगने पर मुस्लिम साथी का धर्म भ्रष्ट हो जाएगा?

आप तो सोचें कि सुबह चार बजे लाउडस्पीकर पर अजान बजने पर हिंदुओं को आपत्ति न हो लेकिन ये मानकर चलें कि वंदे मातरम गाने को लेकर आपकी आपत्ति को समझा जाए। हिंदू लड़की का मुस्लिम घर में शादी करके आना आपको बड़ा मनोहारी लगे लेकिन मुस्लिम लड़की के बारे में ऐसा सोचकर ही आपकी रूह कांप जाए।

जिन्ना इस विरोधाभास को अच्छे से समझते तभी उन्होंने अलग देश की बात की। लेकिन सवाल ये है कि जो लोग इस्लामिक पाकिस्तान की तुलना में सेक्युलर भारत को चुनने का दावा करते हैं अगर उन्हें भी इन्हीं सब परहेज़ के साथ रहना था तो ये समझना मुश्किल है कि अपने मोहल्लों में, अपने लोगों के बीच रहते हुए, अपने ही लोगों में शादी करते हुए दूसरे के धर्म से लगभग एलियन बने रहकर उन्होंने कैसा Secularism चुना है?

तनिष्क के एड पर लोगों के पीछे लोगों की क्या आपत्ति है वो मैंने विस्तार से समझाई लेकिन जिन लोगों ने सेक्युलर भारत चुना वो सारा अली खान के शिवलिंग छूने पर भड़क जाते हैं, सलमान खान को गणपति पूजा करता देख तड़प उठते हैं। न उनसे कैफ को योगा करते देखा जाता है और न ही उन्हें शमी की पत्नी का मंदिर निर्माण पर बधाई देना। अगर हिंदू संस्कृति से जुड़ी हर चीज़ से जुडने पर आपको इतना सख्त एतराज़ है, तो फिर आप सेक्यलुर देश चुनने का और गंगा जमनी संस्कृति जैसी फर्ज़ी बातों का ढिंढोरा पीटने का क्या औचित्य है?

अगर इस देश में सच में गंगा जमनी संस्कृति जैसी कोई चीज़ होती तो हज़ार साल से साथ रहने के बाद भी हम स्कूटर पर कान्हा बने मुस्लिम बच्चे को देखकर हैरान नहीं होते। हमें किसी में एड हिंदु मुस्लिम की झूठी प्रेम कहानी दिखाकर साम्प्रदायिक सौहार्द्र का ढिंढोरा नहीं पीटना पड़ता। हम ढिंढोरा पीटते हैं, हम हैरान होते हैं क्योंकि हम जानते हैं ये सच नहीं। इसी सच को बाबा अम्बेडकर भी अच्छे से जानते थे। वो बाबा अम्बेडकर जिनके नाम का इस्तेमाल भीम और मीम का नारा देने वाले सबसे ज़्यादा करते हैं। उन्हीं अंबेडकर साहब ने कहा था, हिंदू सही होते हैं जब वो कहते हैं कि हिंदू और मुसलमानों के बीच किसी भी तरह का सामाजिक सम्बन्ध स्थापित नहीं हो सकता और ऐसे सम्बन्ध तभी बनेंगे जब लड़की एक धर्म की हो और लड़का दूसरे मज़हब का।

और यहां ये बताने की ज़रूरत नहीं है कि तनिष्क का एड बनाने वाले भी बाबा साहब की सुझाई इस शर्त को अच्छे से समझते थे!

(Article Credit: लेख नीरज बधवार के फेसबुक पेज से लिया गया है)

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Usikov63Mon, 11/09/2020 - 12:10 November 09, 2020