अफगानिस्तान ने अलकायदा के दक्षिण एशिया प्रमुख आसिम उमर के मारे जाने की पुष्टि की है. अफगानिस्तान के मुताबिक आसिम उमर को पिछले महीने अमेरिकी एयरफोर्स ने मार गिराया.

आसिम उमर अपने साथियों के साथ अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में था. अमेरिकी सेना के हमले में उसके 6 साथी भी मारे गए. अफगानिस्तान ने उमर को पाकिस्तानी नागरिक बताया है, जबकि उमर भारत का ही मूल निवासी था. उमर यूपी के संभल का रहने वाला था.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उमर 90 के दशक में देश छोड़कर फरार हो गया था. उमर का असली नाम सनाउल हक था. इंडियन एक्सप्रेस को 2015 में सनाउल के माता पिता ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को दो दशकों से नहीं देखा था. उन्हें यह भी पता नहीं था कि उनका बेटा जिंदा है या मर चुका है. उस वक्त उसके पिता इरफान ने कहा, "उसके गायब हो जाने के कुछ दिन बाद कुछ अधिकारी आए और बताया कि वो आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त था. करीब 7 महीने पहले उन्होंने हमें बताया कि हमारा बेटा जिंदा है. वो मर जाता, हमारे लिए वही बेहतर था."

आसिम की मां रुकैय्या ने बताया, "देवबंद में दारूल उलूम से ग्रेजुएट होने के बाद सनाउल ने सऊदी अरब में पढ़ाई के लिए पैसों की मांग की. उसने पिता से 80 हजार रुपये मांगे. जब पिता ने मना किया तो सनाउल ने अपने पिता से दुर्व्यवहार किया. सनाउल की इस हरकत पर उसके चाचा ने उसे थप्पड़ मारा और गुस्से में सनाउल ने घर छोड़ दिया. हमने उसे खोजने की कोशिश की. पुलिस के पास भी गए लेकिन उसका पता नहीं चल सका. "

सनाउल का एक भाई मुरादाबाद में प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं वहीं दूसरा भाई दिल्ली में इंजीनियर है. सनाउल के पिता इरफान कहते हैं कि उनके परिवार का क्षेत्र में बड़ा नाम था. उनके बाबा जिला मजिस्ट्रेट थे जबकि पिता गांव के मुखिया थे. उन्होंने बताया, " मेरे बचपन में पुलिस वाले हमारे घर गांव के मामलों में बातचीत करने के लिए आते थे. अब वो मेरे बेटे के बारे में पूछताछ के लिए आते हैं. पहली बार 1999 में पुलिस अधिकारी आए और उन्होंने बताया कि 1992 में बाबरी मस्जिद गिरने के बाद हुई आतंकी घटनाओं में मेरे बेटे का हाथ था."

संभल से अलकायदा तक

सनाउल हक ने 1991 में दारुल उलूम से गेजुएशन किया. 1992 में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई. इसके बाद सनाउल जिहादी गतिविधियों में सक्रिय हो गया. 1995 में वो संभल से गायब हो गया और अपने परिवार से संबंध भी खत्म कर लिए. करीब एक साल बाद वो पाकिस्तान पहुंचा. यहां उसने कराची के जामिया उलूम ए इस्लामिया नाम के मदरसे में जाना शुरु किया. इसे आतंक की फैक्ट्री कहा जाता है. इसी मदरसे से मौलाना मसूद अजहर जैसे आतंकी निकले हैं.

इसके बाद हक ने हरकत उल मुजाहिद्दीन ज्वाइन किया और 2004 तक कराची, पेशावर और पीओके में आतंकियों को ट्रेनिंग दी. इसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया और हक वापस 2004 से 2006 तक कराची में हरकत उल मुजाहिद्दीन के ऑफिस में रहा. 2007 में पाकिस्तानी तानाशाह जनरल परेवज मुशर्रफ के आदेश पर इस्लामाबाद की लाल मस्जिद पर कार्रवाई हुई. इसके बाद हक अलकायद की तरफ मुड़ा. वो आतंकियों में पीर बाबा के नाम से मशहूर आतंकी इलियास कश्मीरी के संपर्क में आया.

2013 में उसने पहली बार भारत के खिलाफ जहर उगला और भारतीय मुसलमानों को भड़काने की कोशिश की. 2014 में अलकायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी ने अलकायदा की नई ईकाई की शुरुआत की. इसे अलकायदा इंडियन सबकॉंटिनेंट नाम की इस ईकाई का प्रमुख सनाउल हक को बनाया गया. जवाहिरी ने इसी वक्त सनाउल हक को मौलाना आसिम उमर का नाम दिया था.