राफेल, राम मंदिर, और अमित शाह को कोरोना होना, इन सबमें एक चीज समान है. इन तीनों के होने पर एक खास वर्ग ही बुरी तरह से प्रतिक्रिया दे रहा है. ये वो प्रतिक्रिया है जो राफेल के आने और राम मंदिर के भूमि पूजन पर कुंठा का प्रदर्शन करती है, अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव होने पर खुश होकर उत्साह का प्रदर्शन करने लगता है. ये वर्ग किसी खास धर्म से जुड़ा हुआ नहीं है, ये अपने-आप में एक मानसिकता का वर्ग बन चुका है. इस वर्ग को आप कुंठित वर्ग का नाम दे सकते हैं.

इस वर्ग की दलीलें जरा सुनिए. इन लोगों के मुताबिक भारत अभी कोरोना से प्रभावित है, तो राफेल आने से क्या होगा ? इन लोगों से पूछना चाहिए कि चार दिन पहले ये चीन को लेकर सोशल मीडिया पर चिंता जताते रहे थे. चिंता से खतरे को लेकर पीएम को आगाह कर रहे थे, अब जब राफेल आया है, तब इन्हें भूख और कोरोना में राफेल का क्या काम जैसे उम्दा सवाल पूछने हैं. भूखा आदमी भी आखिर सड़क पर कुत्तों से बचने के लिए लाठी लेकर चलता है, यहां पर तो 130 करोड़ लोगों की सुरक्षा का सवाल है. आपके आस-पास जब चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी हों, तो आपको राफेल जैसी लाठियों की ज़रूरत हमेशा ही होती है.

इसी तरह राम मंदिर पर इनकी दलीलें सुनिए. नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं, उन्हें भूमि पूजन के लिए नहीं जाना चाहिए. कोरोना के समय में भूमि पूजन नहीं होना चाहिए. राष्ट्रपति भवन, पीएम आवास में इफ्तार पार्टी हो, वो सामान्य बात है. पीएम दाउदी वोहरा मुस्लिम समाज के बीच चले जाएं वो भी ठीक है लेकिन राम मंदिर के लिए भूमि पूजन नहीं कर सकते. पीएम मोदी की पार्टी का मुख्य एजेंडा ही राम मंदिर रहा है. वो अपने घोषणापत्रों में राम मंदिर बनाने का वादा कर चुके थे. अब जब राम मंदिर बन रहा है, तो भला पीएम क्यों भूमि पूजन के लिए न जाएं. मोदी जी बगैर किसी झिझक के अपने एजेंडे पर चल रहे हैं जिस पर उन्हें हमेशा चलना चाहिए. पीएम ने जिस मौके लिए वोट मांगा था, बस उस मौके के आने पर वो अपना काम रहे हैं. इसमें किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

अब आते हैं, अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव होने पर. अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव होने पर एक महिला पत्रकार ने पोस्ट लिखी. इस पोस्ट में लिखा था कि "चाहें अमित शाह को कोरोना हुआ हो या कोरोना को अमित शाह. हम दोनों का खात्मा चाहते हैं". हालांकि ये पोस्ट पत्रकार महोदया ने बाद में डिलीट कर दी. इसी तरह एक कथित अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार हैं, आतिश तासीर. वो अपने ट्वीट में क्या कहते हैं. जरा इस पर भी गौर फरमाइए.

इन महोदय का अधिकतर जीवन इंग्लैंड या अमेरिका का व्यतीत (सोचिए भारत के बारे में कितना जानते होंगे) हुआ है. अभी भी ये अमेरिका में ही रहते हैं. इन्होंने बीते दिनों मशहूर पत्रिका टाइम्स में एक आर्टिकल लिखा, जिसमें पीएम मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताया गया. इनका आरोप है कि इस आर्टिकल से नाराज होकर गृहमंत्री अमित शाह ने इनका ओसीआई कार्ड (जो नियमों के मुताबिक पहले ही गलत तरीके से बनाया गया था) को कैंसिल कर दिया. अब इसके बाद से ऊपर दिए गए ट्वीट की तरह के अनर्गल प्रलाप करते रहते हैं. आतिश तासीर की जैसी ही एक बड़ी लॉबी है भारत में, जिसका अमित शाह ने कुछ न कुछ लिया है. जिनकी मंत्रालयों में एंट्री बंद है. कैबिनेट में मंत्रियों को पद दिलाने में दलाली बंद है. इस लॉबी ने कल अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव होने का अपने ही अंदाज(जैसा मर्सिया पढ़ते हुए वो मनाते हैं) में जश्न मनाया. खास बात ये है कि ये लॉबी खुद को सेकुलर बोलती है. इनके अलावा, एक खास समुदाय के लोग भी अमित शाह के बीमार होने का जश्न मना रहे थे. ऐसा लग रहा था कि मानो अब अमित शाह अब ठीक होंगे ही नहीं. कहा जाता है कि हर चीज एक सीमा में अच्छी होती है, दोस्ती भी और दुश्मनी भी. इतने भी मत दुश्मन बन जाइए क्योंकि अमित शाह देश के गृहमंत्री हैं जब कहीं आप बाहर विदेश में फंसे होते हैं न, तो यही सरकार आप को निकालकर लाती है.

इन मामलों को अब उल्टे क्रम में देखते हैं. अमित शाह की बीमारी पर खुश होने पर माना जा सकता है कि- एक पार्टी और व्यक्ति के प्रति कुंठा है. राम मंदिर पर माना जा सकता है कि एक पार्टी और एक धर्म के प्रति कुंठा है, और राफेल के बारे में प्रतिक्रिया देखकर कहा जा सकता है कि इनकी कुंठा देश के प्रति ही है. जो भी है, अच्छी बात ये है कि अब सब खुले तौर पर सामने हैं. ऐसे में कम से कम इन्हें पहचानने के लिए कोशिश नहीं करनी पड़ रही. अब जब पहचान हो ही गई है, तो जल्द ही सबका कुंठा का निवारण भी हो जाएगा.