जल्लीकट्टू: कारण जिनके वजह से ये परम्परा चलती रहने चाहिए

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shashank trivedi Sat, 01/21/2017 - 02:42 Jallikattu, Jallikattu Protest

दो साल पहले प्रतिबंध लगने के बाद जल्लीकट्टू एक  बार फिर चर्चा में है । तमिलनाडु में इस पर प्रतिबंध हटाने की माँग को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं । तमिल फिल्म सिनेमा के सारे बड़े कलाकार भी इस पर से प्रतिबंध हटाने की माँग कर रहे हैं ।
जल्लीकट्टु पर प्रतिबंध का समर्थन या विरोध का फैसला करने से पहले  जरूरी है कि हम इस खेल को समझे । स्पेन का राष्ट्रीय खेल बुलफाइटिंग और जल्लीकट्टु दोनों की तुलना करते हुए लोग इन्हें समान बता रहे हैं लेकिन जल्लीकट्टु दरअसल एक  अलग ही खेल है । जल्लीकट्टु में एक साँड को प्रतियोगिता के कुछ समय पहले एक स्थान पर बंद कर दिया जाता है । जब प्रतियोगिता के समय पर उसे खोला जाता है तब वो गुस्से के साथ तीव्र गति से भीड़ में भागता है । उस समय पर उसकी पीठ पर बैठ कर उसे नियंत्रित करना होता है । नियम के अनुसार एक समय में एक व्यक्ति ही साँड की सवारी कर सकता है । अगर वो व्यक्ति  निश्चित दूरी तक साँड की पीठ पर सवार रहने में कामयाब रहता है तो व्यक्ति विजेता घोषित होता है । अगर वो ऐसा नही कर पाता तो साँड को विजेता घोषित किया जाता है । विजेता व्यक्ति को उचित पुरुस्कार दिया जाता है जोकि सिक्कों के रूप में साँडो के  सींगों में बँधा होता है ।साँड को शक्ति का प्रतीक मानकर और भविष्य में अच्छी नस्लें प्राप्त करने के लिए प्रजनन के लिए प्रयोग किया जाता है ।जीतने वाले साँडों की शक्ति लंबे समय तक बनी रहे इसके लिए उन्हें अच्छा आहार दिया जाता है ।
दूसरी तरफ विजेता साँडों के मालिक भी इस खेल के लिए पहले से ही साँड को तैयार करते हैं । अच्छा खाना खिलाते हैं ताकि साँड विजयी बने और प्रजनन के लिए इस्तेमाल कर इससे धन प्राप्त किया जा सकें ।
खेल के कुछ नियम हैं जैसे साँड की पूँछ पकड़ना ,गलत तरीके से पकड़ना  ,इस खेल में पूरी तरह से प्रतिबंधित है ।
हमारे पूरे देश में विडंबना है कि जब  गाय एक मादा संतान को जन्म देती है तो दूध के लालच में उसका अच्छे तरीके से ध्यान रखा जाता है । जबकि नर संतान को सड़को पर घूमने के लिए खाली छोड़ दिया जाता है । इस खेल की वजह से उन साँडों की भी अच्छी देखभाल होती है और ये खेल साँडों को क्रूरता से कटने से बचाता है ।
हमारे देश में तमाम ऐसे उदाहरण हैं जिनमें नियम तो अच्छे हैं लेकिन उनका पालन नही होता है । जल्लीकट्टु भी इनसे अलग नहीं है । बेशक इतने बड़े स्तर जब कोई खेल होगा तो उसमें नियम टूटते ही होंगें ,कुछ गलत तरीके भी विजेता बनने के लिए अपनाए जाते होंगें लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम पूरे खेल को प्रतिबंधित कर देगें । जरूरी है कि हम उस खेल में  सुधार करें । कोशिश करें कि  नियम न टूटने पाएँ । उनका अच्छे से पालन हो ।
एक सवाल पेटा और उन तमाम लोगों से है जो जल्लीकुट्टु का विरोध कर रहे हैं क्या ये एकमात्र त्योहार है जिसमें जानवरों पर अत्याचार होता है ? और भी कई त्योहार हैं कृपया सारे पशुओं को एक ही नजर से देखिए ।

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