नोटबंदी: एक सख्त निर्णय, अच्छे भविष्य के लिए

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shashank trivedi Sat, 11/19/2016 - 19:40 Money Demontisation, Black Money

8 नवंबर  को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम सन्देश में  500 और 1000  के नोट वापस लेने की घोषणा के तुरन्त बाद देश में  लोगों ने एक अच्छी प्रतिक्रिया दी।  काले धन पर इसे  बड़ी चोट बताया गया , जाली नोटों पर भी इसे बड़ी मार के रूप में देखा गया ,लोगों को महसूस हुआ की आज ईमानदारी की कीमत का पता उन्हें चल गया।  एक लोकप्रिय टीवी एंकर भी इससे बड़े खुश दिखाई दिए ,उनके चैनल के आर्थिक मामलों के पत्रकार ने भी इसे बड़ा कदम बताया और ये भी स्वीकार कर लिया की इस सरकार के शासनकाल में काले धन के मामलें में सुधार हुआ है।  जिस वक्त ये सारी प्रतिक्रियायें दी जा रही थी उस समय की घोषणा के अनुसार बैंकों को एक और एटीएम को 2 दिन बंद रहना था ,लोगों को लगा की एक  दो दिन की बात है ,दो दिन में समस्या दूर हो जाएगी।  अस्पतालों , रेलवे स्टेशनों और कई महत्वपूर्ण स्थानों को भी इससे बाहर  रखा गया था ,शायद लोगों  को लगा की एक क्रांतिकारी कदम बड़ी आसानी से देश में लागू हो जायेगा।  जो लोग अंधविरोध करते थे वो शांत थे या कड़वे रूप में प्रशंसा कर रहे थे और समर्थक मोदी का गुणगान कर रहे थे। 
ये कहानी थी प्रधानमंत्री की घोषणा के तुरंत बाद की, अब बात आती है जनता के कुछ करने की उन परिस्थितियों में सबसे पहला झटका सरकार की तरफ से लगता है की एटीएम समय से चालू नहीं हो पाते इसलिए सारे लोग बैंको की तरफ ही जाने लगते हैं  और यहाँ से शुरू होता  है दूसरा भाग, योजना को बेकार और गरीबों के लिए शोषण भरी बताने के लिए ,अधिकांश  सोशल मीडिया  योजना की बुराई करने लगा।  बैंकों में लगने वाली पंक्तियों के साथ ही  आलोचना और भी ज्यादा कड़वी तब हो गयी जब दवाई की दुकानों और अस्पतालों में नियमों के उल्लंघन और उनसे कई आम लोगों के मरने की बात सामने आयी।  इसी तरह की कई और घटनाएँ भी देखने को मिली जिनमें 500 और 1000 के नोटों के आभाव में लोगों को रोज़ के जरुरत के सामान भी नहीं मिल पा रहे हैं।  
अब हम इन सारी बातों को देखते हैं तो पता चलेगा ये योजना एक ऐसी योजना है जिससे काले धन और जाली नोटों  पर कड़ा प्रहार हुआ है।  अगर काले धन की बात की जाये तो ये सिर्फ नेताओं ,और अम्बानी -अडानी जैसे उद्योगपतियों तक ही सीमित नहीं है।  देश में तमाम सरकारी बाबुओं ,अफसरों और छोटे उद्योगपतियों के पास भी प्रचुर मात्रा में काला धन है ,और ये धन देश में रहकर भी मुख्यधारा से बाहर है। इन लोगों के घरों से लेकर ,बैंक के लॉकरों तक में वो धन पड़ा हुआ होगा।  ये सारा धन तत्काल समाप्त हो गया है।  इसी तरह जाली नोटों के काम करने वाले लोगों को भी एक ही झटके में बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।  देश में सट्टा ,स्मैक जैसे पदार्थों का धंधा करने वालों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।  इससे ये पता चलता है की योजना का उद्देश्य सही है। 
अब योजना के लागु करने के तरीके को यदि देखा जाये तो पता चलेगा की गुप्त  रखने के प्रयास में कई जरुरी कदम नहीं उठाये जा सके  ,समय पर नए नोट बैंकों और एटीएम में पूरी तरीके से न आ पाने के कारण लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।  
अब अगर हम लोगों के अस्पतालों में धन के अभाव में  मरने की बात या दवाई  की दुकानों पर  नियमों के पालन न होने की बात पर गौर करें तो ये मामले सिर्फ धन के अभाव और नियम न मानने की बात के नहीं हैं बल्कि ये असंवेदनशीलता के भी  हैं और समय समय पर सामनें आते रहते हैं।  इस तरह की घटनाएं समाज के खोखलेपन को उजागर करती हैं और दिखाती हैं की समाज के रूप में हम कितनें अपरिपक्व हैं। जब कोई सरकार इस तरह के बड़े फैसले करती है तो वो उम्मीद करती है की उसके देश के लोग इस योजना में सहयोग करेंगें और इसलिए वो एक दूसरे का सहयोग भी करेंगें  लेकिन ये दुर्भाग्य की बात है की हम इन घटनाओं को रोकने के प्रयास करने की बजाय इनके घटित होने पर इनका दोष सरकार को देते हैं  और मुक्त हो जातें हैं। सरकार न तो हर किसी के अंदर मानवता पैदा कर सकती है और नहीं पुलिस  सभी से नियमों का पालन करवा सकती है.,ये घटनाए होती रहीं हैं और आगे भी होंगी क्योंकि उनमे हमें हर बार किसी न किसी की तलाश रहती है जिस पर हम दोष मढ़ सकें।  
कई स्थानों पर बहुत से लोग एक दूसरे की मदद करते हुए देखे गए  ,कई लोग पंक्ति में खड़े लोगों के लिए पानी ला रहे हैं , पढ़े लिखे लोग बगैर पढ़े लिखे लोगों की मदद कर रहे थे।  ऐसे स्थानों पर शांति है  आसानी से सारा काम हो रहा है।   
अगर एक आशा की किरण भी जगी है की भ्रष्टाचार के विरूद्ध कुछ हो सकता है तो हमें एक मौका सरकार को देना चाहिए ,इस कार्य को एक बार जनकल्याण का समझ कर उस भावना के साथ एक समाज के रूप में कार्य करना चाहिए।  हम एक बड़ी आबादी और सीमित संसाधन वाले देश हैं  ऐसे में अगर कुछ कठिन परस्थितियाँ बनती हैं तो हम एक साथ खड़े होकर ही उसका सामना कर सकते हैं।  

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