Source: Ideology

Ideology and Development

shashank trivedi's picture
shashank trivedi Thu, 04/14/2016 - 03:24

किसी भी व्यक्ति की सोच उस व्यक्ति को महान या नीच बनाती है  क्यो कि सोच के अनुसार ही व्यक्ति कार्य करता है और उस कार्य का व्यक्ति के जीवन के पर प्रभाव पड़ता है,और जब वह सोच चाहे वो अच्छी हो या बुरी जब अन्य लोगो पर प्रभाव डालने लगे और एक समूह  को प्रभावित कर दे तो  वो एक विचारधारा का रूप ले लेती है और ये विचारधारा समाज पर  प्रभाव डालती है और इसीलिए समाज में वैचारिक बहसों का अपना योगदान है जिससे उचित विचार धाराओं का विकास हो सके।
     शासन और विचारधारा का भी अपना एक सम्बन्ध है जो अटूट है और बगैर उचित विचारधारा के शासन दिशाहीन हो जाता है और साथ ही  शासन का   कार्य होना चाहिए की वो समाज का न सिर्फ भौतिक विकास करे बल्कि वैचारिक विकास भी करे और कोशिश करे की  देश से बुरी विचारधाराओं का अंत हो और एक सम्पूर्ण विकसित देश का निर्माण हो। 
     जिन परिस्थितियों से देश इस समय जूझ रहा है ऐसे समय में देश में विकास की योजनाओ के साथ साथ वैचारिक क्रान्तियों की भी आवश्यकताः है। आज के  समय में इसका उल्टा होता है और देश में वैचारिक स्तर और बुरा हो जाता  है ,इस बात को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है की बगैर  वैचारिक शुद्धता के देश में कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती चाहे उसके लिए कितने ही संसाधनो  का प्रयोग ही क्यों न कर लिया जाये ,दुःख की बात है की आज की   वैचारिक  जागरूकता  सिर्फ विज्ञापनो  तक ही सीमित है  ही प्राय जिनमे  भी भ्रस्टाचार हो जाता है। वैचारिक  जागरूकता के बगैर योजना कैसे  असफल हो सकती है -आरछण उसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है -  
      देश में लोग भले ही कहते हो की आरछण का उद्देश्य सफल है क्योकि समाज में दलित वर्ग आर्थिक रूप से मजबूत है ऊँचे पदो पे है वो  सही हो सकते हैं लेकिन  जमीन की इस सच्चाई को समझने की आवश्यकता है की आज  दलितों और उच्च वर्ग के लोगो के बीच वही खायी है जो सालों पहले थी और स्थिति ऐसी भी है की भविष्य में देश में जातिगत गृहयुद्ध शुरू हो सकता है दोनों के बीच  समरसता का बुरी तरह आभाव  है  ,अगर देश के लोग आज भी एक दूसरे से सिर्फ इसीलिए घृणा करते हैं क्यो कि वो एक भिन्न जाती से है तो देश का भला हुआ ये कोई कैसे सोच सकता है। 
अभी कुछ दिनों पहले नीतीश  कुमार ने देशी शराब पर प्रतिबन्ध लगाने की बात की ,कदम स्वागत योग्य है लेकिन अगर लोग इस बारे में गम्भीरता  से नहीं सोच पाते की शराब पीना हानिकारक है तो प्रतिबन्ध के बावजूद शराब बिकेगी और ये वो शराब  होगी जो मानक विहीन होगी ,आये दिन मौतें होंगी ,आबकारी विभाग पैसा खायेगा और आपका  प्रतिबन्ध   सिर्फ एक सरकारी आदेश बनकर रह जायेगा इसलिए प्रतिबंध के साथ वैचारिक जागरूकता आवश्यक है  जो लोगो को शराब से  होने वाले नुकसानों ,परिवार पर असर के बारे में बताये ,और देखिये की  आपका प्रतिबंध आपके लक्ष्य को पूरा करेगा। उत्तर प्रदेश में गुटखा बिक्री पर प्रतिबंध है ,लेकिन गुटखा यहाँ दूसरे रूप में बिक रहा है और  ये प्रतिबंध मजाक बनकर रह गया है।  
      नरेंद्र मोदी अगर देश में विकलांग  के स्थान पर दिव्यांग बात  करते हैं तो सराहना करनी चाहिए क्योँकी  इससे विकंलंगो के प्रति देश में एक सम्मान का विचार बनेगा और फिर निश्चित रूप से उनके लिए बनाने वाली योजना भी सफल हो इसके प्रतिशत बढ़ जायेंगे। 
    उपर्युक्त उदाहरण वैचारिक शुध्दता के महत्वा को स्पष्ट करते हैं। 
इसलिए मै यही कहना चाहूंगा की देश का विकास करें. योजनाये बनाये लेकिन उन योजनाओ के वैचारिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए कार्य करे तो निश्चित रूप से योजना सफल होगी और देश एक सम्पूर्ण विकास की तरफ अग्रसर होगा। 

(Shashank Trivedi is a columnist and political analyst. The views expressed are personal. He can be reached at s.shashanktrivedi@gmail.com)

up
182 users have voted.

Read more

Post new comment

Filtered HTML

  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <blockquote> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Allowed pseudo tags: [tweet:id] [image:fid]
  • Lines and paragraphs break automatically.

Plain text

  • No HTML tags allowed.
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Lines and paragraphs break automatically.