बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है. उनसे बड़े होने पर देश के लिए कुछ अच्छा करने की उम्मीद की जाती है लेकिन इसके लिए बच्चों के स्वास्थ्य को भी जरूरी माना गया है. जब हम उन्हें बेहतर माहौल और जरूरी सुविधाएं देंगे तभी उनसे भी कुछ वापस पाने की उम्मीद कर सकते हैं. WHO की रिपोर्ट कहती है कि भारत में जन्म लेने वाले हर 1 हजार बच्चों में से 39 की मौत 5 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है. खास बात ये है कि हमारा रिकॉर्ड इस मामले में बांग्लादेश और भूटान से भी खराब है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जन्म लेने वाले 1000 बच्चों में 39 की मौत जिंदगी के 5 साल पूरे करने से पहले ही हो जाती है. WHO का ये आंकड़ा 2017 का है. हमसे आकार में छोटे और गरीब कई देशों की हालत इस मामले में हमसे बेहतर है. श्रीलंका में यही आंकड़ा मात्र 9 है. पड़ोसी देश नेपाल में यही मृत्यु दर 34 है. एक समय में भारत का हिस्सा रहा और अब पड़ोसी देश बांग्लादेश में जन्म लेने वाले हर 1000 बच्चों में से 32 बच्चों की मौत 5 साल से पहले हो जाती है. दुनिया के सबसे गरीब देश माने जाने वाले भूटान में ये आंकड़ा 31 है.

हमारे एक और पड़ोसी और बात बात में परमाणु बम की बात करने वाला देश पाकिस्तान इस मामले में काफी खराब हालत में है. यहां जन्म लेने वाले हर 1000 बच्चों में 75 की मौत 5 साल से पहले हो जाती है. हमारे आस पास के देशों में ये आंकड़ा सबसे खराब है. अगर भारत के बड़े प्रतिद्वंदी चीन की बात करें तो वो हमसे बेहद ही अच्छे हालात में है. यहां 5 साल से कम के शिशुओं की मृत्युदर का आंकड़ा 9 है. विकाशसील देशों में गिना जाने वाले और ब्रिक्स में हमारे सहयोगी देश ब्राजील की हालत भी हमसे काफी अच्छी है. यहां शिशु मृत्यु दर का आंकड़ा 15 है.