बीजेपी हैदराबाद में निकाय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. निकाय चुनाव के लिए योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री अमित शाह तक की रैलियां होंगी. दिल्ली और मुंबई को छोड़ दें तो निकाय चुनाव के लिए बीजेपी शायद ही इतना सक्रिय हुई हो. एक तरफ हैदराबाद का निकाय चुनाव है तो दूसरी तरफ बंगाल का विधानसभा चुनाव है. दोनों ही राज्यों में बीजेपी बड़े स्तर पर सक्रिय है लेकिन आखिर हैदराबाद के निकाय चुनाव पर बीजेपी इतना ज्यादा फोकस क्यों कर रही है? क्या हैदराबाद के सहारे बीजेपी, बंगाल को जीतना चाहती है?

एक तरफ जहां बीजेपी योगी आदित्यनाथ और अमित शाह जैसे फायर ब्रांड नेताओं की रैलियां कराने वाली है वहीं दूसरी तरफ हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी बीजेपी के सामने खड़े होने के लिए तैयार हैं. उन्होंने साफ़ तौर पर बीजेपी को चुनौती दी है कि हैदराबाद में चुनाव जीतकर जिताएं, उन्होंने बीजेपी को चुनौती दी है कि पीएम नरेंद्र मोदी को चुनाव में लाकर दिखाएं. ओवैसी हैदराबाद से सांसद हैं और बीजेपी चाहेगी कि यह चुनाव बीजेपी बनाम ओवैसी के तौर पर देखा जाए. बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटें जीती हैं. जाहिर सी बात है कि यह पांच सीटें बिहार के मुख्य विपक्षी दल RJD को मिलने वाली थी. मजबूत ओवैसी बिहार में बीजेपी को मजबूती देगे गए.

अब वही ओवैसी बंगाल में भी जोर-शोर से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं. कांग्रेस इन दिनों अपने खराब दौर से गुजर रही है. पार्टी न केवल चुनाव हार रही है बल्कि अंर्तकलह का सामना भी कर रही है. तृणमूल कांग्रेस अगर मुस्लिमों की तरफ ज्यादा झुकती है तो बाकी वोट गंवा बैठेगी. बाकी राज्यों में बीजेपी के सामने विपक्षी पार्टियों का यही हाल हुआ है. वाममोर्चा भी बंगाल में कमजोर पड़ चुका है. ऐसे में ओवैसी मुसलमानों के बड़े रहनुमा के तौर पर उभर सकते हैं.

बीजेपी जितने बड़े स्तर पर चुनाव लड़ेगी, उतनी ही उस चुनाव की कवरेज होगी और उसके विपक्षियों की भी. अगर बीजेपी चुनाव जीती तो दक्षिण भारत में एक और किले को जीतने की और कदम बढ़ा देगी. अगर बीजेपी चुनाव हारी तो ओवैसी बीजेपी को हरा पाने वाले एक नेता के तौर पर पहचान बना पाएंगे. कुल मिलाकर दोनों ही हालत में बीजेपी की जीत ही नजर आ रही है. मजबूत ओवैसी बिहार में बीजेपी की राह आसान कर चुके हैं, शायद बंगाल में भी वो बीजेपी को फायदा दे जाएं. कुल मिलाकर शायद बीजेपी हैदराबाद के निकाय चुनाव से बंगाल का विधानसभा चुनाव फतह करने का ख्वाब देख रही है.