गरुड़ कमांडो भारतीय सेना की सबसे नवनिर्मित स्पेशल फोर्स है, जिसका गठन साल 2003 में किया गया था। गरुड़ कमांडो फोर्स के गठन का मुख्य मकसद भारतीय वायु सेना के संस्थानों और उपकरणों की आतंकी हमलों से सुरक्षा प्रदान करना था। मौजूदा समय में कुल गरुड़ कमांडो की संख्या लगभग 1500 है।

गरुड़ कमांडो हर समय दुश्मन का मुकाबला करने के लिए तैयार रहते है। चाहे किसी आतंकी हमले का जवाब देना हो या युद्ध के समय दुश्मन सेना के सैन्य ठिकानों पर गुप्त ऑपरेशन करना हो। नक्सलियों के खिलाफ पैरा मिलेट्री फोर्सेज के अभियानों में भाग लेना हो या कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में भाग लेना ये सब गरुड़ कमांडो की ट्रेनिंग का हिस्सा है।

एक गरुड़ कमांडो के लिए चयनित होने और उसके बाद पूरी तरह से तैयार होने में 3 साल का समय लगता है। अलग अलग चरणों में 3 साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद गरुड़ कमांडो तैयार होते है। भारतीय सेना में पश्चिमी देशों की सेना की तरह स्पेशल फोर्सेज के लिए एक कमांड नहीं है। इसलिए गरुड़ कमांडो चीफ ऑफ़ एयर स्टाफ यानि की वायु सेना अध्यक्ष के आधीन आते है।

भारतीय थल सेना के पैरा स्पेशल कमांडो और नेवी के मारकोस की तरह गरुड़ कमांडो का चयन सेना के ही जवानों से नहीं होता। गरुड़ कमांडो के चयन के लिए स्पेशल प्रक्रिया अपनायी जाती है। आम नागरिक भी आवेदन कर सकते है। चयनित कैंडिडेट को बेहद कठिन शारीरिक और मानसिक ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। इस प्रक्रिया में सफल होने वाला ही गरुड़ कमांडो की ट्रेनिंग के लिए आगे जाता है।

हर एक कैंडिडेट को सिर्फ एक बार ही गरुड़ कमांडो ट्रेनी बनने का मौका मिलता है। किसी भी चरण में असफल रहने वाला दोबारा गरुड़ कमांडो के लिए आवेदन नहीं कर सकता है। वैसे ट्रेनिंग को पास करने सम्बंधित कोई आधिकारिक डाटा उपलब्ध नहीं है। पर ऐसा माना जाता है की 215 चयनित कैंडिडेट में सिर्फ 30 से 42 ट्रेनी ही गरुड़ कमांडो बन पाते है।