कमर्शियल सेक्स, पेड सेक्स या हिंदी में कहें तो वैश्यावृत्ति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए "Locanto" जैसे App ने लाइफ काफी आसान कर दी है। डिजिटल युग में बस आप App को डाउनलोड करें, लोकेशन सेलेक्ट करे और आपके आसपास उपलब्ध कॉल गर्ल्स की लिस्ट फोटो के साथ आपके सामने आ जाती है। इस लिस्ट को आप अपने पसंद के हिसाब से फ़िल्टर भी कर सकते है।

आप कुछ घंटो से लेकर पूरी रात के लिए 2००० रूपए से लेकर 25००० रूपए तक में बुकिंग कर सकते है। जैसा आपकी जेब वहन कर सके।

Locanto जैसे Apps खुलेआम पूरे भारत में ऑपरेट हो रहे है जबकि भारत में वैश्यावृत्ति पूरी तरह से गैर कानूनी है।

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इंटरनेट ने चोरी छिपे चलने वाले इस व्यवसाय में जैसे जान डाल दी है। अभी तक अँधेरे में होने वाले इस व्यवसाय में ग्राहक को कालगर्ल्स ढूढ़नें में हमेशा ही कठिनाई होती थी। सामाजिक भय सबसे ज्यादा होता था। सेक्स वर्कर्स को भी अनजान व्यक्ति के साथ जाने में हमेशा ही एक डर लगा रहता था।

दोनों के भय अलग तरह के होते थे। ग्राहक को लूट लिए जाने का भय, ऐसी जगह जाने पर किसी पहचान के व्यक्ति के द्वारा देखे जाने पर सामाजिक बदनामी का डर।
सेक्स वर्कर्स के लिए ग्राहक का हिंसात्मक होने का डर, सर्विस के बाद पैसे न मिलने का भय इत्यादि. लेकिन इंटरनेट ने इन सारे डरों को ख़त्म कर दिया है।

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अब सेक्स वर्कर चुनने से लेकर पैसे का लेन देन सब ऑनलाइन है। इन apps से मोबाइल नंबर लेने के बाद WhatsApp से फाइनल डील होती है जिसमें सर्विस की टर्म्स कंडीशन और पैसे सब कुछ तय होता है। हालात ये हैं की नोटबंदी के समय paytm तक से पेमेंट का ऑप्शन Apps पर मौजूद था।

इंटरनेट ने इस इंडस्ट्री को पूरी तरह से सर्विस इंडस्ट्री में बदल दिया है। पहले ज्यादातर सेक्स वर्कर्स दलालों के जरिये ऑपरेट करते थे और मुख्यता ये लड़किया गरीब राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, पूर्वोत्तर के राज्यों या नेपाल से बहलाफुसलाकर इस दलदल में धकेल दी जाती थी।
पर अब जब से शहरों की तरफ पलायन बढ़ा और बहुत से लड़के लड़किया अपने घरों से दूर पढ़ाई के लिए शहरो में आये तो उनमे से कई बच्चे जो अच्छे घरों से सम्बंधित है और उनके घर वाले उन्हें अच्छे पैसे भी भेजते है वो भी इस तरह के दलदल में आ रहे है क्यों की वो एक शानदार लाइफ जीना चाहते है, मौजमस्ती करना चाहते है।

इंटरनेट की दुनिया में अब इसे देहव्यापार या वैश्यावृति के नाम से नहीं बल्कि "एस्कॉर्ट सर्विस" के नाम से जाना जाता है। एस्कॉर्ट सर्विस देने वाली लिस्ट में सिर्फ लड़कियां ही नहीं है बल्कि लड़के और "shemale" जिसे आम बोलचाल की भाषा में हिजड़ा कहा जाता है वो भी शामिल है। ये लोग सिर्फ एक जगह से ऑपरेट नहीं करते, जो लड़का या लड़की दिल्ली में है अगर आप उन्हें पैसे देते है तो वो चंडीगढ़, पंचकूला, राजस्थान, देहरादून, नोएडा, लखनऊ तक पहुंच जायेंगे।

पुलिस की तरफ से होने वाली लापरवाही की वजह से ये एक नेटवर्क की तरह से पूरे देश में फैल गया है। अमेरिका जैसे पश्चिम के देशों में पुलिस न सिर्फ सोशल मीडिया के जरिये बल्कि इन "Apps" में ग्राहक बन कर ऐसे लोगों को गिरफ्तार करती है। अभी कुछ समय पहले ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने इंटरनेट से होने वाले मानव तस्करी के सम्बन्ध में एक कानून पास किया जिसके बाद मशहूर वेबसाइट "Craigslist" ने इस तरह के अपने एक सेक्शन को हमेशा के लिए बंद कर दिया। भारत में मौजूद आईटी एक्ट का सही तरह से उपयोग अभी भी चर्चा का विषय है।

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