गुजरात के पूर्व IPS संजीव भट्ट ने दावा किया था कि वो नरेंद्र मोदी के गुजरात के सीएम रहते एक खास मीटिंग का हिस्सा थे. ये मीटिंग 2002 में हुई थी. मीटिंग के बारे में दावा किया जाता है कि उस समय नरेंद्र मोदी ने कई पुलिस अधिकारियों को देर रात बुलाकर दंगा करने वाले हिंदुओं पर कार्रवाई न करने का कहा था. संजीव भट्ट दावा करते हैं कि वो इस मीटिंग में शामिल हुए थे. संजीव भट्ट के दावे को एक वरिष्ठ पत्रकार मनु जोसेफ ने नकारा है. संजीव भट्ट को हाल ही में एक शख्स की हिरासत में मौत के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

मनु जोसेफ 2002 में आउटलुक के पत्रकार थे और उन्होंने नरेंद्र मोदी की उस मीटिंग के बारे में पहली बार स्टोरी की थी. इसमें नरेंद्र मोदी की 27 फरवरी 2002 की रात की उस मीटिंग का जिक्र था जिसमें उन्होंने हिंदुओं को गोधरा कांड का बदला लेने का मौका देने की बात कही थी. मनु जोसेफ लिखते हैं कि ये स्टोरी उन्होंने नरेंद्र मोदी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री हरेन पांड्या के हवाले से की थी. हरेन पांड्या की कुछ दिनों बाद हत्या कर दी गई इसलिए मनु जोसेफ और आउटलुक ने उनके नाम का खुलासा करने का निर्णय लिया.

मनु जोसेफ संजीव भट्ट के दावे के बारे में लिखते हैं कि पांड्या ने उन्हें पुलिस अधिकारियों और अफसरो के नाम की जानकारी दी थी जो बैठक में मौजूद थे. पांड्या हालांकि खुद इस बैठक का हिस्सा नहीं थे लेकिन उन्हें इसके बारे में पूरी जानकारी थी. मनु जोसेफ के मुताबिक पांड्या ने कभी भी संजीव भट्ट का नाम उस बैठक के बारे में नहीं लिया. जोसेफ से इस दौरान कई ऐसे अधिकारियों ने बात की जो नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करते थे लेकिन संजीव भट्ट ने कभी भी उनसे बातचीत करने की कोशिश नहीं की.

2011 में अचानक संजीव भट्ट ने ये खुलासा किया की वो नरेंद्र मोदी की बैठक में शामिल हुए थे. मनु जोसेफ साफ लिखते हैं कि संजीव भट्ट का दावा झूठा होने की पूरी संभावना है. आपको बता दें कि संजीव भट्ट पीएम मोदी के खिलाफ लगातार बोलते रहे हैं. उनकी पत्नी श्वेता भट्ट ने 2012 में पीएम मोदी के खिलाफ गुजरात के मणिनगर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था.