तीन खबरें हैं, तीनों को जोड़िए और भारत में कोरोना के गंभीर संकट को समझने की कोशिश करिए-

1. ब्राजील में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, डेंगू और कोरोना वायरस में क्रास हुआ है. ऐसा हो सकता है कि दोनों का एक घातक कॉम्बिनेशन बन गया हो. इसमें पॉजिटिव बात ये है कि डेंगू और येलो फ़ीवर की वैक्सीन कोरोना में काम आ सकती है. हालांकि, अभी कुछ रिसर्च की ज़रूरत है.

2. भारत में कोरोना की हालत में सुधार, रिकवरी रेट 90 फीसदी पहुंचा.

3. भारत के तमाम छोटे-बड़े शहरों में डेंगू का प्रकोप, लगातार हो रही हैं मौतें.

भारत में कोरोना वायरस से हालत खराब है. वो अलग बात है कि लोगों के बीच बीमारी का डर खत्म हो चुका है और सावधानी गायब है लेकिन फिर भी लोगों की मौतें हो रही हैं. कोरोना के इस संकट के बीच, डेंगू से भी मौतें होने लगीं. कह सकते हैं दो घातक बीमारियों की दोहरी मार से लोग बेहाल हो चलें हैं. घर में रहकर अगर कोरोना से बच भी जाएं तो पता चले कि डेंगू के शिकार हो गए. यूपी के हरदोई जिले का एक कस्बे, बिलग्राम का उदाहरण हम ले सकते हैं. यहां लोग दोनों बीमारियों से मर रहे हैं. दरअसल सरकार भले ही कोरोना से लड़ने के लिए अपनी पीठ ठोंकती रहे लेकिन सच्चाई ये है कि इलाज तो दूर, हम अभी तक इस बीमारी का टेस्ट तक ढंग से नहीं कर पा रहे हैं. बिलग्राम के एक मुख्य डॉक्टर, 11 दिन तक बुखार से पीड़ित रहे. उन्होंने 3 बार टेस्ट करवाया, तीसरे टेस्ट में उन्हें कोरोना की पुष्टि हुई. तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कोरोना पॉजिटिव आने के अगले ही दिन उनका निधन हो गया. डॉक्टर साहब, पूरी महामारी के दौरान अपना हॉस्पिटल खोले लोगों का इलाज करते रहे और आखिर में खुद कोरोना के शिकार हो गए. अगर टेस्ट में कोरोना की पुष्टि समय से हो गई होती तो डॉक्टर साहब का जीवन बच सकता था.

एक छोटे कस्बे से एक अच्छे डॉक्टर का चला जाना, कस्बे लिए कितना बड़ा नुकसान है ये बताने की ज़रूरत नहीं है. ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट तक नहीं आती हैं. जैसे तैसे टेस्ट हो गया तो रिपोर्ट तक नहीं आई. मरीज पूरी तरह से भगवान के ऊपर आश्रित है, अगर बचे तो बच गए वर्ना भगवान को प्यारे हो गए. इसी कस्बे में कई लोगों की मौत हो गई जिनमें कोरोना के लक्षण थे लेकिन उनका कोई टेस्ट नहीं हुआ. अगर टेस्ट होता और पुष्टि होती तो कोरोना से मरने वाले लोगों में इनकी गिनती होती. भारत में ऐसे ही कितने लोगों की मौत हुई होगी, आप अंदाजा लगा सकते हैं.

इस समय बिलग्राम में कथित रूप से डेंगू का कहर फैला हुआ है. 20 से 30 साल की उम्र के कई नौजवान अपनी जान गंवा चुके हैं. तमाम लोग अस्पताल में भर्ती हैं. सभी को डेंगू होने की बात की जा रही है. डेंगू होने की पुष्टि इस बात से की जाती है कि प्लेटलेट्स कितनी हैं, अगर प्लेटलेट्स बहुत कम हैं और डेंगू से मिलते-जुलते लक्षण हैं तो डेंगू बता दिया जाता है. ब्राजील की रिसर्च की मानें तो कोरोना और डेंगू में क्रास हुआ है. अगर वाकई उस रिसर्च की बात यहां सही है तो बीमारी से बचाव और इसके लिए बेहतर इलाज की ज़रूरत पहले से ज्यादा बढ़ गई है. ऐसे में लोगों के बीच जागरुकता और प्रशासन का बेहतर इलाज के लिए तैयार रहना ज़रूरी है लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है.

कागजों में कोरोना का रिकवरी रेट बढ़ता जा रहा है, शायद उसे डेंगू में एडजस्ट किया जा रहा है. याद रखिए जब बड़े शहरों में डेंगू फैलता था और हल्ला मचता था तब बिलग्राम जैसे छोटे कस्बों में 'विचित्र बुखार' का कहर बताकर कागज अपडेट किए जाते थे. ये विचित्र बुखार कैसा था, कैसे फैलता था, क्या इसका भी कोई वायरस था? किसी को कभी इसका जवाब नहीं मिला. अब कोरोना और डेंगू मिलकर कहर बरपा रहे हैं तो सिर्फ हालात को कागजों में संभालने की जिम्मेदारी, विचित्र बुखार की बजाय डेंगू के ऊपर आ गई है. इसी बीच बिहार में 'तुम मुझे वोट दो, मैं तुम्हें फ्री वैक्सीन दूंगा' का नारा दे दिया गया है. मौतों का चार्ट ऊपर जा रहा है, सियासत गिरती जा रही है. दोनों कहां जाकर रुकेंगे, किसी को पता नहीं.