बीते दिनों कश्मीर में 40 जवानों की शहादत के बाद कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं.कुछ लोगों ने पाकिस्तान को तुरंत उड़ा देने की मांग की.कुछ लोगों ने कश्मीर के लोगों के खिलाफ गुस्सा दिखाया तो कुछ लोगों ने कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की मांग की.इनमें अभिनेता कमल हासन प्रमुख थे.इनका मानना है की कश्मीर में जनमत संग्रह कराया जाए.जनता की राय सुनी जाए.इसके बाद जो फैसला आए उसे सुना जाए.हम आपको इन सभी मांगों के कुछ अहम पहलुओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बाद आप भावनाओं से इतर इनकी जमीनी सच्चाई को समझ पाएंगे-

1.पाकिस्तान पर हमला कर युद्ध करने की मांग-भारत ने पाकिस्तान को सीधे युद्ध में हर बार हराया है.भारतीय सेना की वीरता और साहस किसी भी प्रकार के शक से परे है.इसमें कोई शक नहीं की भारत इस बार भी युद्ध में पाकिस्तान को पस्त कर सकता है लेकिन युद्ध कई मोर्चों पर होता है.हमारे देश की अर्थव्यवस्था को भी इससे नुकसान पहुंचेगा.हम लगातार विकास कर रहे हैं और ये युद्ध हमें पीछे धकेल सकता है.दूसरे युद्ध आखिर युद्ध है.इसमें बड़ी संख्या में सैनिकों को अपनी कुर्बानी देनी पड़ेगी.बेशक पाकिस्तान पर हमला करके उसे तहस नहस करके हम पुलवामा जैसे तमाम हमलों की संभावना को खत्म कर सकते हैं लेकिन आखिर इन सैनिकों की जानें अनमोल हैं और उन्हें यू हीं गंवाना नहीं चाहिए.
सवाल उठता है की हल क्या है?हल दरअसल सर्जिकल स्ट्राइक की तरह का हमला है या अमेरिका ने जिस तरह से पाकिस्तान में ड्रोन हमले किए हैं वो हैं.बेहतर खुफिया जानकारी के दम पर इस तरह के हमलों को अंजाम दिया जाए की हमारे नुकसान की संभावना कम से कम हो और दुश्मन को कड़ा सबक भी दिया जाए.इन हमलों के बाद पाकिस्तान के पास सुधरने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.भारत ने जिस तरह की सर्जिकल स्ट्राइक की है उसी तरह की सर्जिकल स्ट्राइक लगातार करना चाहिए,हवाई हमले करने चाहिए.पाकिस्तान में वो साहस नहीं है की वो खुद से अब युद्ध जैसे विकल्प की ओर देख सके.

2.कश्मीरियों के खिलाफ गुस्सा-पुलवामा हमले के बाद कश्मीरियों के खिलाफ भी गुस्सा देखने को मिला.इसके बाद भारत के बुद्धिजीवी वर्ग ने इनकी सुरक्षा की मांग की.कुछ ने तो अपने नंबर भी शेयर किए ताकि कश्मीरियों की मदद हो.सवाल ये है की बाढ़ से लेकर तमाम हालातों में साथ देने के बावजूद कश्मीरी नागरिक सुधरते क्यों नहीं हैं.जेएनयू में भारत विरोधी नारेबाजी में ये शामिल होते हैं.अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ये अलग बवाल करते रहते हैं.जयपुर में भी कश्मीरी छात्र इसी तरह का बवाल कर चुके हैं.श्रीनगर NIT में तिरंगा फहराने का प्रयास करने वाले छात्रों की पिटाई की जाती है.सैनिक हाथ में बंदूक लेकर भी शांत रहते हैं लेकिन उन पर पत्थर और गोलियां बरसाईं जाती हैं.आतंकी जब हमारे देश के जवानों पर फायरिंग कर रहे होते हैं तो इन्हीं कश्मीरियों की भीड़ आकर पत्थरबाजी करती है ताकि वो आतंकी भाग सकें
अगर किसी को अपने पक्ष में लाना हो तो मोहब्बत पहला तरीका है.भारत और भारतीयों ने उसका खूब परिचय दिया है.अब संदेश साफ होना चाहिए जो मोहब्बत से रहेगा उसे वो मिलेगी.अगर आप सैनिकों की जान लेने वालों के साथ हैं तो आप सुकून से नहीं रह पाएंगे.इस्लाम के डर के नाम पर जो मौत का नंगा नाच कर रहे हैं उनके साथ सहानूभूति रखने वालों को भी संदेश देना जरूरी है.इसलिए कश्मीरियों को मोहब्बत के साथ नफरत का दीदार भी कराना भी अच्छा कदम है.

3.कश्मीर में जनमत संग्रह की मांग-अगर हमारे शरीर का कोई हिस्सा इतना सड़ जाए की उसे काटना पड़ जाए तो शायद वही सही होगा.कश्मीर में हमारे जवानों की शहादत देखकर यही ख्याल आता है.इसके लिए जनमत संग्रह करवाना जरूरी नहीं है.बगैर सोच विचार किए ऐसा किया जाना चाहिए,लेकिन सवाल उठता है की क्या कश्मीर देने भर से सारी समस्या का हल हो जाएगा.आप पूरा परिदृश्य समझिए.कश्मीर के पास में पंजाब है.पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चीन अपनी पैठ बना चुका है.श्रीलंका और नेपाल में भी चीन की पैठ ठीक ठाक है.आज हमारे पास जैसा भी कश्मीर है कम से कम वहां चीन नहीं घुस सकता है.अगर हम ये कश्मीर भी पाकिस्तान को दे देंगे तो कल को जिहाद का अगला एलान पंजाब और दिल्ली तक आएगा और पूरा देश ऐसे आतंकवाद की चपेट में आएगा.इसलिए कश्मीरियों के मानवाधिकार और शांति की चिंता करने वाले थोड़ा दूर की सोंचे.पढ़े लिखें और फिर मूर्खतापूर्ण तर्कों के जरिए देश को कमजोर करने की कोशिश करें.