इन दिनों किसान बिल को लेकर हंगामा मचा हुआ. पंजाब के किसान आंदोलन कर रहे हैं. कुछ किसान दिल्ली के अंदर आ चुके हैं जबकि कुछ दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर जमे हुए हैं. किसानों का कहना है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो दिल्ली आने वाले सभी रास्तों को बंद कर देंगे.

इससे पहले, किसानों को दिल्ली आने से रोकने की कोशिश की गई और उनके ऊपर पानी की बौछार भी की गई. किसानों के ऊपर इस कार्रवाई की चौतरफा निंदा भी हुई. इधर गृहमंत्री अमित शाह ने बयान दिया कि वो किसानों के आंदोलन को राजनीतिक नहीं मानते. आज हम किसानों के इसी आंदोलन के बारे में बात करेंगे.

न्यूज वेबसाइट गांव कनेक्शन की मानें तो किसानों की पांच प्रमुख मागें हैं.

1. तीनों किसान बिल वापस लिए जाएं.
2. एमएसपी को लेकर कानून बनाया जाए.
3.बिजली बिल संशोधन रद्द किया जाए
4. पराली जलाने पर सजा-जुर्माने का नियम बंद हो
5. गन्ना भुगतान का मसला

फिलहाल अभी किसानों का गुस्सा, किसान बिलों को लेकर है और एमएसपी को लेकर कानून बनाने को लेकर. इस कानून को लेकर अब किसानों के आंदोलन तक देखें तो पूरा मामला मोदी सरकार के प्रचार विभाग की बड़ी विफलता मानी जा सकती है. खासतौर पर तब, जब अधिकतर मीडिया सरकार के साथ ही खड़ा नजर आता है. बीते दिनों जब यह किसान बिल पास हुए, तो किसी भी बड़ा हिंदी न्यूज वेबसाइट पर इन बिलों की जानकारी साफतौर पर नहीं थी.

आज भी किसान बिलों की जानकारी न्यूज चैनल वेवसाइटों पर नहीं मिलेगी. सरकार के मंत्री ट्विटर पर ट्वीट करके किसानों का भ्रम दूर करने की कोशिश करते हैं. इस बिल को लेकर किसानों में सबसे बड़ा भ्रम यह है कि एमएसपी इस बिल के बाद खत्म हो जाएगी. पीएम मोदी और बाकी सरकार लगातार यह बात करते रही है कि एमएसपी खत्म नहीं होगी. किसान बिल आने के बाद फसलों पर बढ़ी हुई एमएसपी के दाम भी जारी किए और फसल की खरीद भी एमएसपी के हिसाब से हुई. इससे, साफ है कि एमएसपी खत्म नहीं होने वाली है.

फिर भी सरकार की तरफ से यह साफ संदेश जनता के बीच नहीं जा पाया कि एमएसपी खत्म नहीं होगी. एमएसपी की बात करें तो आज तक किसी भी कानून में इसका जिक्र नहीं है फिर भी आज तक एमएसपी चालू है. एमएसपी जैसी तय व्यवस्था को खत्म करना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं है और मोदी सरकार भी यह नहीं चाह रही होगी.

अगर किसान आंदोलन की बात करें तो यहां भी सरकार का तंत्र फेल नजर आया. पहले किसानों को दिल्ली से आने की रोकने की पूरी कोशिश की गई. उन पर लाठी चलाई गई और पानी की बौछार की गई. इस सब की तस्वीरें वायरल हुईं और सरकार की फजीहत होने लगी. जब यह सब हो गया तब किसानों को दिल्ली आने की इजाजत दे दी गई. इससे यह पता चलता है कि सरकार ने इस आंदोलन को लेकर शायद बिल्कुल ही कोई तैयारी नहीं की.

किसान आंदोलन इस सरकार की बड़ी विफलता है और सरकार को इस पूरे संकट को खत्म करने की जल्द से जल्द कोशिश करनी चाहिए.