भारत अब बायकॉट के बिना अधूरा है. देश में शायद ही कोई ऐसा हफ्ता जाता है जिस दिन किसी का बायकॉट न किया जाता हो. बायकॉट की ये मांग अधिकतर चीनी सामान या किसी बॉलीवुड वेब सीरीज या फिल्म के खिलाफ उठती है. खास बात ये है कि आज तक ढंग से किसी भी चीज का बायकाट नहीं हो पाया, उल्टा चीजों को पब्लिसिटी ही मिल जाती है.

एक दौर था जब देश में गांधी ने स्वदेशी का आवाहन किया था और विदेशी सामान की होली जलाई गई थी. उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था, फिर भी गांधी के आंदोलन सफल होते थे. आज का दौर नेटवर्क क्रांति का है फिर भी 'बायकॉट इंडिया मूवमेंट' सोशल मीडिया पर चंद गंदी गालियों और धार्मिक उन्माद से ऊपर नहीं बढ़ पाता. खास बात ये है कि इस दौर में सोशल मीडिया पर हर दूसरा आदमी नेता बन चुका है. लोग उल्टा सीधा लिखकर फॉलोअर बढ़ा लेते हैं और किसी धर्म या पक्ष के ठेकेदार बन जाते हैं.

आजकल एक वेब सीरीज और एक फिल्म का विरोध चल रहा है. वेब सीरीज मिर्जापुर के बायकॉट की अपील की जा रही है तो दूसरी तरफ अक्षय कुमार की फिल्म लक्ष्मी बाम्ब भी बायकॉट करने वालों के निशाने पर है. मिर्जापुर के विरोध की वजह अभिनेता अली फजल हैं जो CAA के खिलाफ बयान दे रहे थे और प्रदर्शन में शामिल भी हुए थे. इसके अलावा फरहान अख्तर की वजह से भी ये विरोध हो रहा है. सवाल ये है कि एक वेब सीरीज में तमाम लोग काम करते हैं, जब आप उसका विरोध करते हैं तो उन सभी लोगों के रोजी रोटी पर सवाल उठा रहे होते हैं. इनमें तमाम वो भी होंगे जो CAA के समर्थक हैं. अली फजल एक नागरिक हैं और उनका अधिकार है किसी भी बात पर अपनी राय रखना और उनके इस अधिकार की वजह से तमाम लोगों के काम के बायकॉट की अपील करना बेकार है. अब सोचिए अगर अनुराग कश्यप की वजह से सेक्रेड गेम्स का विरोध किया जाता तो उसमें रणवीर शौरी ने भी काम किया था. रणवीर शौरी भारत के कथित लिबरल वर्ग के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं. ऐसे में रणवीर शौरी का हाल गेंहू के साथ घुन वाला हो जाता.

अक्षय कुमार की फिल्म लक्ष्मी बॉम्ब का भी विरोध हो रहा है. फिल्म में अक्षय, आसिफ नाम के शख्स का किरदार निभा रहे हैं जिसे प्रिया नाम की लड़की से प्यार हो जाता है. अक्षय कुमार पर फिल्म में लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है. अक्षय कुमार वो अभिनेता रहे हैं जिन्हें मोदी सरकार के समर्थकों में गिना जाता है. कोरोना काल में उन्होंने पीएम केयर्स फंड में बड़ा दान भी दिया था. आमतौर पर अक्षय की फिल्मों के साथ रिलीज होने वाली फिल्मों के बायकॉट के ट्रेंड चलते थे लेकिन अक्षय अब खुद इसके शिकार हैं. लव जिहाद के नाम पर बायकॉट का जो पैमाना तैयार किया गया है उसके हिसाब से तो लव जिहाद के सबसे बड़े आरोपी बीजेपी नेता शहनवाज हुसैन और मुख्तार अब्बास नकवी भी हैं. रोज रोज के बायकॉट से अच्छा है अतर्धामिक विवाह पर बैन लगवा दिया जाए ताकि कोई दिक्कत ही न हो.

सोशल मीडिया एक मंडी बन चुका है. हर कोई अपना-अपना सामान लगाकर बैठा है. यहां भिन्न भिन्न चीजें मिलती हैं. यहां कभी बाबा का ढाबा हिट हो जाता है तो तमाम जरूरतमदों के लिए पैसे और ब्लड का भी इंतजाम आराम से हो जाता है लेकिन आम समाज की तरह यहां नकारात्मकता ही ज्यादा हावी है. सोशल मीडिया पर चलने वाले ये तमाम बायकॉट ट्रेंड उसी नकारात्मकता का हिस्सा हैं. आम लोगों को चाहिए कि वो इनसे दूर रहे हैं, जैसे आप समाज में बुरे लोगों से दूर रहते हैं या काम से काम रखते हैं वैसे ही सोशल मीडिया के समाज पर भी करें. बाबा के जैसे तमाम ढाबाओं को हिट कराएं और ऐसे फर्जी और बेबुनियाद ट्रेडों को आईटी सेल के लिए छोड़ दें ये उन्हीं की रोजी रोटी है.