भारत में कोरोना वायरस के केस तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. हर दिन कोरोना वायरस के रिकॉर्ड तोड़ मामले सामने आते जा रहे हैं. दुनिया के संपन्न देशों की हालत भी कुछ अच्छी नहीं है. अमेरिका जैसा महाशक्तिशाली देश में कोरोना वायरस के संकट से बुरी तरह से जूझ रहा है. इसी बीच WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में इतनी तेजी से कोरोना वायरस फैलने का कारण लोगों के पास हाथ धोने के लिए साफ पानी न होना है. WHO की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 3 बिलियन लोग ऐसे हैं जिनके पास घर में साफ पानी नहीं है जबकि 4 बिलियन लोग ऐसे हैं जो साल में कम से कम एक बार पानी की कमी से जूझते हैं.

यूएन के जल प्रमुख गिलबर्ट एफ ह्यून्गबो ने एक इंटरव्यू में कहा, “यह सुरक्षित पानी और सुरक्षित रूप से प्रबं के उपयोग के बिना रहने वाले लोगों के लिए भयानक स्थिति है. साफ पानी पर लंबे समय तक कम खर्च की वजह से अरबों लोगों के पास साफ पानी नहीं और परिणाम हम सब देख रहे हैं." सालों तक साफ पानी और स्वच्छता पर खर्च नहीं किया गया जिसकी वजह से लोगों पर खतरा बढ़ा और आज कोरोना वायरस विकसित और विकासशील सभी देशों में एक श्रंखला में फैल रहा है. ह्यून्गबो के मुताबिक दुनिया को 2030 तक साफ पानी पर 6.7 ट्रिलियन डॉलर खर्च करना है. ये खर्च सिर्फ तुरंत साफ पानी की समस्या को दूर करने के लिए नहीं है बल्कि लंबे समय में साफ पानी की समस्या दूर करने के लिए ज़रूरी है.

हालांकि, इस मुश्किल वक्त में कुछ कंपनिया सामने आईं हैं. जापान का लिक्सिल ग्रुप कॉर्प भारत में 5 लाख यूनिट लगाएगी जिससे भारत में करीब 2.5 मिलियन लोगों को साफ पानी मिलेगा. इन ढाई मिलियन लोगों को ये पानी पूरी तरह फ्री में दिया जाएगा हालांकि, इसके बादस कंपनी खुदरा में साफ पानी बेचना चालू करेगी. यूनिसेफ की पूर्व जल और स्वच्छता प्रमुख क्लैरिसा ब्रोक्लेहर्स्ट कहती हैं, "महामारी के समय में तुंरत इस तरह की मदद का विकल्प ठीक है लेकिन लोगों के घरों में पाइप से साफ पानी पहुंचाने जैसे दूरगामी कदम भी उठाने होंगे.

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक साफ पानी और स्वच्छता की पहुंच की कमी असमानता के बुरे प्रभावों के उदाहरण हैं जिन्हें महामारी ने उजागर किया है. महामारी के बीच साफ पानी की इस कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब हो रहे हैं. घनी आबादी वाले इलाकों में रहने वालों के लिए जिनके लिए पानी के स्त्रोत सीमित हैं, उन पर महामारी का बड़ा प्रभाव पड़ रहा है. यूएन के जल प्रमुख गिलबर्ट एफ ह्यून्गबो के मुताबिक 2050 तक दुनिया में 5.7 बिलियन लोगों की ऐसी आबादी होगी जिसे साल में एक महीने पानी के गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा.

साफ पानी को लेकर भारत में भी केंद्र सरकार जल शक्ति अभियान चला रही है. इसका लक्ष्य 2022 तक भारत के हर घर में पाइप से साफ पानी पहुंचाना है. सवाल ये है कि ये अभियान कितना सफल रहता है और फिलहाल कोरोना के दौर से सरकारें कुछ सबक लेकर साफ पानी को लेकर आगे कुछ तेजी से कदम उठाएंगी या हमेशा की तरह हालात भगवान भरोसे बने रहेंगे.