हाल ही के दिनों में तुर्की अचानक से कई मोर्चे पर सक्रीय हुआ है। सयुंक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर समर्थन देने वालों में कुछ गिने चुने देश ही थे। जिनमे तुर्की और मलेशिया भी शामिल है। तुर्की और मलेशिया ने खुलेआम भारत का विरोध किया और पाकिस्तान के समर्थन भी किया।

मलेशिया ने तो यंहा तक कह दिया की भारत ने कश्मीर पर कब्ज़ा कर रखा है। उसके बाद खबर आयी की पाकिस्तान, तुर्की और मलेशिया मिल कर बीबीसी की तरह एक इंग्लिश अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल बनाएंगे जो की दुनिया में इस्लामॉफ़ोबिआ के खिलाफ लोगों में सही खबर पहुचायेगा।

कुछ दिनों पहले एक और खबर आयी थी की तुर्की पाकिस्तानी नौसेना के लिए कुछ युद्ध पोत का निर्माण भी अपने यंहा करेगा। अब सवाल ये उठता है की नाटो का सदस्य देश तुर्की अचानक से पाकिस्तान पर इतना क्यों मेहरबान है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोगन अपनी ही सेना की बगावत को दबाने में सफल रहे है। उसके बाद हुए चुनाव में भी वो दोबारा जीत कर आये। अब उनकी मंशा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम जगत में वो मुकाम हांसिल करने की है जो की मौजूदा में सऊदी अरब का है।

इन सब के लिए रेसेप एर्दोगन अपने आप को एक सख्त और ताकतवर मुस्लिम नेता के तौर पर देखना पंसद करेंगे। तुर्की की सेना काफी मजबूत और आधुनिक हथियारों से लैस सेना है पर उसके पास परमाणु बम जैसे कोई क्षमता नहीं है। वंही दूसरी तरफ आर्थिक बदहाली से परेशान पाकिस्तान है जिसके पास खाने के लिए खद्यानों की कमी पर पर चीन से चुराई हुई परमाणु तकनीकी और परमाणु हथियार मौजूद है।

ऐसे में रेसेप एर्दोगन अपने लिए एक मौका देख रहे है। अमेरिकी सेना के एक पूर्व विशेषज्ञ के अनुसार पिछले साल तुर्की के कुछ वैज्ञानिकों और रक्षा कर्मियों ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के निरिक्षण किया था। ऐसा मालूम पड़ता है की तुर्की पाकिस्तान को हर तरह की मदद देने को इसी शर्त पर तैयार है की बदले में वो पाकिस्तान से परमाणु बम की तकनीकी हांसिल कर सके।

वैसे पाकिस्तान का रिकॉर्ड इस मामले में अच्छा नहीं रहा है उस पर उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीकी बेचने के आरोप लगते रहते है। इस्लामिक देशों में परमाणु ताकत सिर्फ पाकिस्तान के पास है। पर पाकिस्तान अपनी ख़राब अर्थ व्यवस्था की वजह से अरब देशों या मुस्लिम जगत में कोई खासा स्थान नहीं पा सका है। ऐसे में रेसेप एर्दोगन का मानना है की अगर वो सीरिया में हमला कर कुर्दो को दबाने और सीरिया की जगह कब्ज़ा कर लेने में सफल हो जाते है और साथ ही पाकिस्तान से परमाणु तकनीकी पा लेते है तो कम से कम मुस्लिम जगत का नया खलीफा बनने से उन्हें कोई रोक नहीं सकता है।