चीन इस समय पूरे विश्व में एक असुर की तरह बनता जा रहा है। रोज नए वायरस पैदा करना, तमाम देशों की जमीन को अपना बता देना और विश्व के देशों के विरोध के बाद भी हॉन्ग कॉन्ग के लिए विवादस्पद नया कानून पास कर देना। हर तरफ विवाद, हिंसा को जन्म देना ही इस देश का मूल उद्देश्य बन चुका है।

बाहरी विवादों से घिरे हुए चीन का अंदरूनी हाल भी कुछ अच्छा नहीं है। नागरिकों में सत्ता के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। चीनी राष्ट्रपति के खिलाफ भी कम्युनिस्ट पार्टी में सुगबुगाहट होने लगी है। सत्ता पर पकड़ और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना की रिज़र्व बलों को भी अपने आधीन कर लिया है। जो ये दिखाता है की शी जिनपिंग किसी भी तरह से कोई भी खतरा मोल नहीं लेना चाहते और सेना के हर अंग को अपने आधीन कर लेना चाहते है।

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चीन में मुस्लिम समुदाय के लोगों के जबरिया नसबंदी करने, उन्हें बंदी गृह में रखने और कुरान जैसे धार्मिक ग्रंथो को न पढ़ने की आज़ादी पहले से ही चला आ रहा है और एक आम बात सी बन चुकी है। जबकि उसका खास दोस्त पाकिस्तान दुनिया भर में मुसलमानों की पैरोकारी में लगा रहता है पर चीन में मुसलमानों पर हो रहे अमानवीय व्यवहार पर उसकी आवाज तक नहीं निकलती।

साल 1997 में जब ब्रिटेन ने हॉन्ग कॉन्ग को चीन को सौंपा था तो हॉन्ग कॉन्ग के लोगों के लिए चीन के लोगों से ज्यादा स्वतंत्रता की व्यवस्था की गयी थी। अब नए बने कानून की आड़ लेकर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी हॉन्ग कॉन्ग के लोगों के विरोध को कुचलना चाहती है। नए पास किये गए कानून का विरोध अमेरिका और ब्रिटेन दोनों ही कर रहे है।

भारत के साथ सीमा विवाद तो इस कदर चरम पर है की युद्ध कब हो जाये कुछ कहा नहीं जा सकता। भारत अपने मित्र देशों की मदद से लड़ाई के लिए जरूरी साजो सामान जुटाने में लगा हुआ है। जुलाई में जंहा फ्रांस पहले एक रफाल लड़ाकू देने वाला था अब 6-8 लड़ाकू विमान भारत को सौपेगा। वंही अमेरिका दुनिया की सबसे हल्की होविट्ज़र तोप के अचूक गोले भारत को जल्द से जल्द पहुचायेगा। इजराइल ने वायु रक्षा प्रणाली भारत को देने का वादा किया है।

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इन्ही सब विवादों के बीच आज चीन ने भूटान से लगी हुई सीमा पर भूटान की एक जमीन पर अपना दावा ठोक दिया। यह एक वन्य जीव अभ्यारण है और भूटान का अभिन्न अंग है। इससे पहले इस अभ्यारण को विश्व स्तर से कोई मदद जारी नहीं हुई थी पर जैसे ही आज विश्व बैंक ने मदद राशि की घोषणा की गयी चीन ने अपना दावा ठोक दिया। विश्व बैंक में भूटान का कोई प्रतिनिधि नहीं है और उसका प्रतिनिधित्व भारत के द्वारा किया जाता है। भारतीय प्रतिंनिधि के जरिये भूटान ने चीन की इस हरकत का पुरजोर विरोध किया है।

जमीनी कब्जे, क्षेत्रीय आतंकवाद और कोरोना वायरस के बाद रही सही कसर इस खबर ने पूरी कर दी की चीन में स्वाइन फ्लू की नए तरह की किस्म पायी गयी है और इस वायरस में महामारी फैलाने के पूरे लक्षण मौजूद है। यह नया वायरस G4 EA H1N1 चीन के सुअरों में पाया गया है और सूअर से इंसानो को भी इसने संक्रमित कर दिया है। हलाकि अभी तक यह नहीं पता चल सका है की क्या यह वायरस इंसानो से इंसानो में फैल सकता है। यह वायरस 2009 में चीन से ही फैलने वाले स्वाइन फ्लू जैसा ही है पर कुछ बदलाव के साथ। इस वजह से ऐसा माना जा रहा है की स्वाइन फ्लू की मौजूदा वैक्सीन इस पर शायद ही काम करे। चीनी वैज्ञानिकों के अनुसार अभी तत्काल इस वायरस से कोई खतरा नहीं है पर इस पर नजर बनाये रखने की जरूरत है।

रोज नए वायरस, दूसरे देशों की जमीने कब्ज़ा करना और नित नए विवाद को जन्म देना चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की आदत बन चुकी है। अमेरिका जिस तरह से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ मुखर हो रहा है उससे भविष्य के लिए कई संकेत मिल रहे है। अमेरिका चीन की सत्ता से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चीन को हटाना चाहता है। भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, इंडोनेशिया, ताइवान, वियतनाम जैसे देशों के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के कई देश चीन पर दवाब जरूर बढ़ाएंगे। रूस भी एक निश्चित दायरे में ही चीन की सहायता कर सकता है। ऐसे में चीन के साथ उत्तर कोरिया और उसका पिछलग्गू दोस्त पाकिस्तान ही ऐसे देश है जो शायद भविष्य में किसी संघर्ष में उसके साथ दिखे।