पाकिस्तान की हालिया खबरें पढ़ते होंगे. पाकिस्तान में विपक्ष के अधिकतर नेता जेल में हैं. माना जाता है कि प्रधानमंत्री इमरान खान फौज के इशारे पर काम कर रहे हैं. वो फौज की कठपुतली हैं. पाकिस्तान का इतिहास भी इसी तरह का है. यहां तक कि पाकिस्तान के पहले पीएम लियाकत अली खान की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. लियाकत अली की हत्या आज ही के दिन रावलपिंडी के कंपनी गार्डन में कर दी गई थी. इस कंपनी गार्डन का नाम आज लियाकत अली खान के नाम पर ही है. आज हम आपको बताने वाले हैं पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री की कहानी जो पाकिस्तान बनने के समय जिन्ना के बाद दूसरे सबसे बड़े नेता थे.

इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए लियाकत अली खान जिन्ना के सबसे खास सहयोगी थे. जिन्ना की तरह ही वो हिंदुस्तान के बंटवारे के पक्षधर थे और यही वजह थी कि जब पाकिस्तान बना तो लियाकत अली खान उसके पहले प्रधानमंत्री बने. लेकिन लियाकत इससे पहले भारत के वित्त मंत्री भी रह चुके थे. दरअसल आजादी से पहले देश में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ. पंडित नेहरु इस सरकार में प्रधानमंत्री थे. लियाकत अली खान इस सरकार में मुस्लिम लीग के नुमाइंदे के तौर पर शामिल हुए. उन्हें वित्त मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया. दरअसल ये सरकार भारत का विभाजन रोकने का आखिरी कोशिश थी जो विफल साबित हुई. कांग्रेस और मुस्लिम लीग की जिम्मेदारी थी कि वो इस सरकार को मिलकर चलाते लेकिन आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा. लियाकत अली खान पर आरोप था कि वो वित्त मंत्री के तौर पर सरकार के काम रोकते हैं. जरूरी कामों के लिए फंड रोकते हैं. जैसी उम्मीद थी, वैसा ही हुआ अंतरिम सरकार चल नहीं पाई और भारत का विभाजन हो गया. लियाकत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने.

लियाकत अली खान की भूमिका पाकिस्तान में भी कोई बेहतर नहीं मानी जाती. उनके ऊपर कई तरह के आरोप लगाए जाते हैं जिनमें से कई सच दिखाई भी पड़ते हैं. लियाकत पर आरोपों की शुरुआत भारत से रिश्तों को लेकर करते हैं. पाकिस्तान बनने के बाद आजाद भारत पर पहला हमला लियाकत अली खान के वक्त में हुआ. उस वक्त पाकिस्तानी फौज ने कबायलियों के साथ मिलकर भारत पर हमला किया. ऐसा माना जाता है कि फौज ने लियाकत की मर्जी के बगैर ऐसा किया था. अगर इस तथ्य को सही मान भी लिया जाए तो पता चलता है कि एक आदमी जिसने धर्म के नाम पर एक देश बनवाया और उसी देश की फौज तक को संभाल नहीं पाया. अगर लियाकत ने फौज को भारत पर हमला करने की इजाजत दी थी तो पता चलता है कि पाकिस्तान की आज की बदहाली के लिए किस तरह से उसके पूर्वज जिम्मेदार हैं.

कई लोग लियाकत अली खान को आधुनिक पाकिस्तान का जनक कहते हैं. वाकई आधुनिक पाकिस्तान की जो हालत है उसके लिए लियाकत अली जिम्मेदार थे. दरअसल पाकिस्तान में भ्रष्टाचार रोकने के नाम पर लियाकत अली खान ने PRODA नाम का एक्ट लाया. भ्रष्टाचार करने वाले और पद का दुरुपयोग करने वाले नेता इसके तहत 10 साल के लिए बैन कर दिए जाते थे. उनके इस कानून के तहत कई विपक्षी नेता जेल में डाले गए. बाद में तानाशाहों ने इसी कानून का इस्तेमाल करके सत्ता पर पकड़ बनाई. पूर्व पीएम बेनजीर भुट्टो की सरकार इसी कानून के तहत बर्खास्त हुई थी.

लियाकत अली खान पर एक और संगीन आरोप लगता है. यह आरोप पाकिस्तान के कायदे आजम कहे जाने वाले जिन्ना की बहन फातिमा ने लगाया था. दरअसल मोहम्मद अली जिन्ना की हालत मौत से पहले बहुत ज्यादा खराब थी. जिन्ना के सपनों के जिस मुल्क को बनाने के लिए हजारों लोगों की जान गई, उसी मुल्क में जिन्ना को मरते वक्त एक एंबुलेंस भी नसीब नहीं हुई. फातिमा ने अपनी किताब माई ब्रदर में लिखा है कि जिन्ना बीमार हालत में एंबुलेंस में लेटे थे. अचानक एंबुलेंस रुक गई. फातिमा ने ड्राइवर से पूछा कि क्या हुआ तो जवाब मिला कि एंबुलेंस में पेट्रोल खत्म हो गया है. जिन्ना ने भी बहन से एंबुलेंस रुकने की वजह पूछी तो पता चला कि एंबुलेंस खराब है. कुछ ही देर में दूसरी एंबुलेंस आएगी. जिन्ना ने यह सुना और चुपचाप अपने स्ट्रेचर पर लेट गए. उनके चेहरे पर उस वक्त मक्खियां भिनभिना रहीं थीं.

फातिमा लिखती हैं कि एक रोज लियाकत अली खान जिन्ना को देखने आए. उन्हें देखने के बाद खाने की टेबल पर बैठे लियाकत अली खान हंस रहे थे. उन्हें जिन्ना कि कोई फिक्र ही नहीं थी. फातिमा के मुताबिक अगर लियाकत चाहते तो जिन्ना के इलाज के लिए बेहतर इंतजाम कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

लियाकत अली खान की हालत भी अजीब सी थी. एक तरफ वो पंजाबियों को छोड़कर किसी पर भरोसा नहीं करते थे, तो गैर पंजाबियों के हितों के लिए चिंतित भी रहते थे. लियाकत अली खान के इसी रवैये ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा. खुद को सेकुलर देश कहने वाले पाकिस्तान में उन पर आरोप लगे कि वो मुहाजिरों(भारत से पाकिस्तान गए मुस्लिमों) के शुभचिंतक हैं. कहते हैं इसी छवि ने उनकी जान भी ले ली. 16 अक्टूबर को 1951 को रावलपिंडी के कंपनी बाग में उनकी हत्या कर दी गई. हत्या का रहस्य आज भी एक रहस्य ही है. जिस शख्स ने उनकी हत्या की उसे दो लोगों ने मार डाला और उन दो लोगों को भीड़ ने मार डाला. विडंबना देखिए 56 साल बाद नफरत से जन्में पाकिस्तान में उसी बाग में एक और पूर्व पीएम बेनजीर भुट्टो की हत्या कर दी गई. वो हत्या भी आज तक रहस्य ही है.